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Omicron Covid 19: ओमिक्रॉन की उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार कुतरने वाले जीव

Rama Posted on: 2023-05-01 15:53:00 Viewer: 301 Comments: 0 Country: India City: Singrauli

Omicron Covid 19: ओमिक्रॉन की उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार कुतरने वाले जीव Omicron Covid 19

 

Covid 19 Update: कोविड-19 महामारी के दूसरे वर्ष के अंत में सार्स कोरोनावायरस-2 (SARS-CoV-2) के ओमिक्रॉन संस्करण के नाटकीय प्रवेश ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था। यह महामारी के दौरान एक अप्रत्याशित घटना थी, जो वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों; दोनों के लिए चुनौती बनकर उभरी थी। 26 नवंबर 2021 को, डब्ल्यूएचओ ने इसे चिंताजनक वायरस के रूप में नामित कर दिया था।

एक नये अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने आशंका व्यक्त की है कि SARS-CoV-2 वायरस का ओमिक्रॉन संस्करण संभावित रूप से चूहा, गिलहरी, खरगोश जैसे कुतरने वाले रोडेन्ट्स (कृन्तक) प्रजाति के जीवों से उत्पन्न हुआ होगा। वैज्ञानिक पड़ताल कर रहे हैं कि कोविड-19 महामारी के दूसरे वर्ष में कैसे SARS-CoV-2 वायरस में इतने सारे रूपांतरण हुए थे।

वैज्ञानिकों का मानना है कि रिवर्स ज़ूनोसिस, कृन्तक आबादी में प्रसार, और बाद में ज़ूनोसिस के रूप में फैलने से संभवतः ओमिक्रॉन वायरस के चिंताजनक स्वरूप का विकास हुआ। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर; थिरुमलाई मिशन अस्पताल, रानीपेट, तमिलनाडु; और अपोलो अस्पताल, नवी मुंबई के शोधकर्ताओं के अध्ययन में यह बात उभरकर आयी है।

पूर्व अध्ययनों में, SARS-CoV-2 वायरस के ओमिक्रॉन संस्करण के पशु प्रजातियों से मनुष्यों में पहुँचने का अनुमान लगाया गया था। इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं द्वारा ओमिक्रॉन वेरिएंट की संभावित उत्पत्ति के लिए दो परिकल्पनाएं पेश की गई हैं। पहली परिकल्पना के अनुसार, ओमिक्रॉन वेरिएंट की संभावित उत्पत्ति के लिए लंबे समय तक SARS-CoV-2 संक्रमण से ग्रस्त कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों में होने वाले उत्परिवर्तन को जिम्मेदार माना गया है।

दूसरी परिकल्पना में, पशु प्रजातियों में रिवर्स ज़ूनोसिस को जिम्मेदार बताया जा रहा है, जिसमें कोई बीमारी मनुष्यों से जंतुओं में फैलती है, जो जंतुओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा करती है। शोधकर्ताओं ने पशु प्रजातियों में रिवर्स ज़ूनोसिस संक्रमण, अनुकूलित उत्परिवर्तन के साथ उस पशु प्रजाति में एनज़ूटिक (स्थानिक पशु महामारी) प्रसार, और जंतु-जनित रोग (ज़ूनोसिस) के रूप में मनुष्यों तक इस वायरस के पहुँचने का अनुमान लगाया है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि ये दोनों स्थितियाँ ओमिक्रॉन के विकास के पीछे जिम्मेदार हो सकती हैं। लेकिन, बाद वाली स्थिति के कारण कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन संस्करण के उभरने की संभावना अधिक थी। शोधकर्ताओं ने एक अन्य अध्ययन के आधार पर पहली परिकल्पना को खारिज किया है, जिसमें 7-9 महीनों की अवधि में तीन एचआईवी पॉजिटिव व्यक्तियों में संक्रमण के दौरान वायरस के अल्फा संस्करण के स्पाइक प्रोटीन के आरबीडी क्षेत्र में केवल 2-3 नये रूपांतरण (म्यूटेशन) पाए गए।

अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, आरबीडी क्षेत्र में दो साल से कम समय में SARS-CoV-2 संक्रमण से ग्रस्त कमजोर प्रतिरक्षा वाले संक्रमित व्यक्तियों में करीब 15 रूपांतरण संभव नहीं थे। दूसरी परिकल्पना को लेकर शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका समर्थन करने वाले अन्य अध्ययनों पर आधारित प्रमाण मौजूद हैं। हालाँकि, जहाँ वायरस के ‘रिवर्स जूनोसिस’ और ‘एनजूटिक ट्रांसमिशन’ के लिए पर्याप्त प्रमाण थे, तो वहीं इस सवाल का जवाब नहीं मिल सका है कि कृतन्क जीव वायरस से कैसे संक्रमित हो सकते हैं।

यह अध्ययन शोध पत्रिका करंट साइंस में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन के शोधकर्ताओं में टी. जैकब जॉन, धन्या धर्मपालन और मंडलम एस. शेषाद्री शामिल हैं।

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