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Year 2022: भारत के स्पेस सेक्टर के लिए बेहद अहम रहा यह साल

Admin Posted on: 2022-12-25 15:19:00 Viewer: 408 Comments: 0 Country: India City: Bengaluru

Year 2022: भारत के स्पेस सेक्टर के लिए बेहद अहम रहा यह साल Year 2022: This year was very important for India's space sector

Year 2022: भारत के स्पेस सेक्टर के लिए बेहद अहम रहा यह साल

Singrauli Mirror News : भारत ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत 60 के दशक में डॉ. विक्रम साराभाई के विजन के साथ एक छोटे से रूप में की थी। छोटा इसलिए क्योंकि आज के समय की तुलना में उस समय रॉकेट के पार्ट्स को साइकिल पर ले जाया जाता था। उस शुरुआत से लेकर पिछले 6 दशकों की भारत की अंतरिक्ष कार्यक्रम की जो यात्रा रही है और आज देश इस क्षेत्र में जिस मुकाम पर खड़ा है आज उन्हीं उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

भारत ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक छोटी सी शुरुआत से आज विश्व के सम्मुख एक विशाल उदाहरण स्थापित कर दिखाया है। अगर आप बीते 6 दशक पहले जब भारत ने इस यात्रा को शुरू किया था उस बारे में याद करें तो उस समय अमेरिका और तत्कालीन सोवियत यूनियन लगभग चंद्रमा की धरती पर उतरने की तैयारी कर रहे थे, उस समय हम गीत गाते थे चंदा मामा दूर के…

इसके बाद के समय से अब तक भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में जितनी तीव्रता के साथ अपने स्पेस प्रोग्राम को आगे बढ़ाया, इससे जाहिर होता है कि हमारे वैज्ञानिकों में कितनी प्रतिभा और योग्यता रही होगी। दरअसल, पहले के समय में अभाव के कारण उस तरह का वातावरण उन्हें नीति निर्धारित करने वाली व्यवस्थाओं के माध्यम से उपलब्ध नहीं हो पाता था और वह कमी पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद दूर हुई।

बीते 8 साल में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को मिला क्वांटम जंप
पिछले 8 साल में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक क्वांटम जंप हुआ। इसके पीछे वे क्रांतिकारी निर्णय हैं जो पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए। केंद्र सरकार ने पिछली कुछ रिवायतों और बंधनों को तोड़ते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र को प्राइवेट प्लेस के लिए खोल दिया गया। साथ ही साथ अंतरिक्ष विज्ञान को रोजमर्रा की जिंदगी में नागरिक के जीवन में सरलीकरण लाने के लिए भी उपयोग का साधन बनाने का काम हुआ। हालांकि पहले यह धारणा रही थी कि इस क्षेत्र में गोपनीयता में ही कार्य हो, ऐसा होता भी रहा।

केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष विभाग को किया बंदिशों से मुक्त
भारत ने हाल ही संसद सत्र के दौरान प्रश्नकाल में बताया था कि इसरो ने 19 देशों के 177 सैटेलाइट को लॉन्च किया। सबसे खास बात यह रही कि ये 19 देश विकसित देश थे। इनमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, फ्रांस, इजरायल, जापान शामिल हैं। भारत से विकसित देशों के इतनी बड़ी मात्रा में सैटेलाइट लॉन्च होने से साफ है कि पीएम मोदी ने इसे पिछली बंदिशों से मुक्त कर दिया। दूसरा यह कि विकसित देशों को भी भारतीय वैज्ञानिकों पर इतनी अधिक विश्वसनीयता है कि यदि उनके सैटेलाइट की लॉन्चिंग भारत से होती है तो उन्हें एक सामान्य ढंग से उनके लॉन्च होने की गारंटी मिल जाती है। भारत में अभी तक जितनी भी इस तरीके की लॉन्चिंग हुई है बड़े ही सफल ढंग से हुई है।

देश के पास 100 से अधिक स्टार्टअप्स
इन सबके बीच आने वाले समय में निश्चय ही इस प्रकार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी तो अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण योगदान भी अंतरिक्ष विज्ञान के माध्यम से होगा। बहुत कम ये बात सामने आती है कि अंतरिक्ष विज्ञान के विभाग को प्राइवेट प्लेयर्स के लिए खोल दिया गया, लेकिन इस थोड़े से अवधि काल में भी देश के पास 100 से अधिक स्टार्टअप्स हैं। भारत के इन स्टार्टअप्स की गिनती दुनिया के किसी भी स्टार्टअप ग्रुप के साथ की जा सकती है। हाल ही स्काई रूट ने जो लॉन्चिंग की है दुनिया के चंद एक प्राइवेट ग्रुप्स में से है जिन्होंने अपना रॉकेट विकसित किया हो।

ट्रेनों को दुर्घटना से बचाने के लिए निकाला हल
तकरीबन 6 साल पहले 2016 में विज्ञान भवन में पीएम मोदी के निर्देश के बाद अंतरिक्ष विभाग और दूसरे मंत्रालयों की एक बैठक हुई थी जिसमें स्पेस एप्लीकेशंस की बात की गई थी, ताकि इसकी मदद से मंत्रालयों के इश्यूज को निपटाया जा सके। इस कड़ी में अंतरिक्ष विभाग के वैज्ञानिकों को बारी-बारी से अन्य मंत्रालयों और अन्य विभागों के साथ इस पर चर्चा की ताकि वे जानकारी साझा कर सकें कि कौन-कौन सी तकनीक इस्तेमाल में लाई जा सकती हैं। उदाहरण के तौर पर उस रेल को दुर्घटनाओं से बचाने के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि ट्रेन ट्रैक पर दौड़ रही है और उसके सामने यदि 10-15 किलोमीटर की दूरी पर कोई ऐसी ऑब्जेक्ट आ जाता है जिससे दुर्घटना होना संभव है तो ऐसे में स्पेस टेक्नोलॉजी के माध्यम से उसका पता लगाकर सूचना के माध्यम से सही समय पर ट्रेन को रोका जा सकता है और दुर्घटना होने से बचाया जा सकता है। इसी तरह अंतरिक्ष विभाग भारत के तमाम मंत्रालयों के साथ बातचीत करके उनकी समस्या का समाधान निकालने के लिए स्पेस तकनीक के इस्तेमाल कर रहा है।

भारत के अंतरिक्ष उद्योगों की उपलब्धियों की सूची काफी लंबी
उल्लेखनीय है कि भारत के अंतरिक्ष उद्योगों की उपलब्धियों की सूची काफी लंबी है। स्पेस प्रोग्राम में भारत अपनी ताकत और काबिलियत के बलबूते दुनिया को सिखाने की स्थिति में आ चुका है। तभी तो भारतीय अंतरिक्ष उद्योग आज विश्वसनीयता और अर्थव्यवस्था के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो चुका है। भारत अपने प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान- पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल या पीएसएलवी के लिए दुनिया में अधिकतम सफलता अनुपात अर्जित कर चुका है। अभी कुछ सप्ताह पहले ही भारत के पीएसएलवी ने विकसित और विकासशील दोनों देशों के 36 उपग्रह भी लॉन्च किए हैं।

भारत ने अपना GPS किया विकसित
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अब तक कई उपग्रह लॉन्च किए हैं और जीसैट, पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों और अंतरिक्ष आधारित सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम के लिए व्यापक इन-हाउस उपग्रह निर्माण क्षमताएं हैं। भारत ने अपना जीपीएस भी विकसित कर लिया है, जिसे हम इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम या आईआरएनएसएस कहते हैं। 2013 में भारत के मार्स ऑर्बिटर मिशन के सफल लॉन्च के अलावा, भारत ने चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 के नाम से जाने जाने वाले अपने मिशन को चंद्रमा पर भेजने का दो बार प्रयास किया है। चंद्रमा के लिए तीसरा उपग्रह मिशन, चंद्रयान-3 अगले साल लॉन्च किया जाएगा।

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