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Singrauli Pollution: उर्जाधानी में एनटीपीसी राखड बाँध से उड़ रहे धुल के गुबारे, ग्रामीणों का जीना मु

Admin Posted on: 2023-05-12 17:07:00 Viewer: 368 Comments: 0 Country: India City: Singrauli

Singrauli Pollution: उर्जाधानी में एनटीपीसी राखड बाँध से उड़ रहे धुल के गुबारे, ग्रामीणों का जीना मु Singrauli Pollution: Dust balloons flying from NTPC ash dam in Urjadhani, life of villagers is difficult

 

Singrauli Pollution NTPC Rakhad: जिले के एनटीपीसी द्वारा बिजली उत्पादन के दौरान निकले राखड़ को आसपास के गांव के निकट बनाए गए राखड़ डेम में डाला जाता है जो तेज हवाओं के चलने पर उड़ कर लोगो के घरों तक पहुँच रहा है जिससे खाना, पानी और वातावरण प्रदूषित हो रहा है सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि पीने के पानी में भी राखड़ घुल कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। किसानों की फसलें बर्बाद हो रही है तो वहीं कृषि भूमि बंजर होती जा रही है। ग्रामीणों की मानें तो उनका जीना मुश्किल हो गया है। पिछले कई साल से लगातार शिकायत कर रहे हैं लेकिन जिम्मेदार प्रशासन कुभकर्णीय नींद से जागता ही नहीं।

प्रदेश के सिंगरौली जिले में कोयला खदानों की अधिकता के चलते 11 बिजली संयंत्र हैं। इन बिजलीघरों से हर साल लगभग 3 करोड़ मीट्रिक टन राख निकलती है। इसका 30 फीसदी इस्तेमाल नहीं होता है। उर्जाधानी के नाम से विख्यात सिंगरौली में टीबी, दमा जैसे गंभीर बीमारियों से जिंदगियां राख हो रही हैं। हालत यह है कि यहां की जमीन पर खेती नहीं होती है।

सिंगरौली जिला मुख्यालय बैढ़न से करीब 5 किलोमीटर के दायरे में बसे बलियरी, गहीगढ़, चन्दावल जैसे अन्य इलाके के लोग बिजली घरों से निकलने वाली राख से परेशान हैं। एशिया के सबसे बड़े पावर प्लांट एनटीपीसी के बलियरी में स्थित राखड़ बांध और इस राख बांध से प्रभावित उसके आस पास कई किमी इलाके में समस्या है।

क्या कहते है यहां के युवा रहवासी राजेश

वार्ड क्रमांक 38 के बलियरी में एनटीपीसी के बने इस डाइक से लगातार राखड़ वहां पर रह रहे रहवासियों के घरों में प्रवेश कर रहा है। एवं वहां का हवा एवं जलवायु पूरी तरह से दूषित हो चुका है, छोटे-छोटे बच्चों पर भी इसका बहुत बड़ा बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। इससे कई तरह के बिमारियों से वहां के रहवासी एवं बच्चे ग्रसित हो रहे हैं। इसके सम्बन्ध आम आदमी पार्टी के पूर्व यूथ जिला उपाध्यक्ष एवं वार्ड 38 के प्रत्याशी रहे राजेश रुद्रम के द्वारा 1 साल पूर्व कलेक्टर साहब को ज्ञापन सौंपाकर यह बताया गया था। कलेक्टर साहब या तो राखड़ की व्यवस्था कर ली जाये। या विस्थापन की व्यवस्था की जाये जिसको गंभीरता से लेते हुए। 15 लोगों को राखड़ मे सींचने हेतु काम दिया गया। लेकिन इससे भी निजात नहीं मिल पायी है और कंपनी को ठोस कदम रहवासियो के लिए नहीं उठा रही है।

जहां गर्मी का मौसम आते ही तेज हवाओं के चलने से राखड़ डेम से बड़ी मात्रा में राखड़ उड़ कर आस पास स्थापित गांव के घरों तक पहुंच जाता है और गांवो के लोगो के भोजन, पानी और जीवन को प्रभावित कर देता है। ग्रामीणों की माने तो उनके घरों में डेम से उड़कर आए राखड़ की मोटी परत चढ़ जाती है वही खाने के समान,पीने के पानी और कपड़ो तक में डस्ट जमा हो जाता है जो आस पास के 2 से 3 किमी तक के एरिया को प्रभावित करता है हवा में राखड़ इतनी ज्यादा मात्रा में रहता है कि दूर दूर तक कुछ ठीक से दिखलाई नहीं देता रोड में चलने वाली गाडिय़ा तक नही दिखती और आए दिन बड़ी-बड़ी दुर्घटनाए होती रहती है। ग्रामीण इसे राखड़ की आंधी तूफान मानते हैं गर्मी का समय एनटीपीसी के राखड़ डेम ग्रामीणों लिए अभिश्राप बन कर आता है। एनटीपीसी की लापरवाही से प्रतिदिन हजारों ग्रामीणों के स्वास्थ से खिड़वाड हो रहा है साथ ही पर्यावरण को भारी नुकसान पहुचाया जा रहा है लेकिन अब तक पर्यावण विभाग की उदासीनता से इन पर कोई कार्यवाही नही हो पाया है और न ही राखड़ डेम प्रबंधन के द्वारा कोई उचित व्यवस्था किया गया है देखना होगा कि कब तक ग्रामीणों को राखड़ की आंधी और तूफान से निजात दिलाने जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

किचन तक पहुंच रही राख

राखड़ बांध से राख लेकर जाने वाले भारी वाहनों से भी राख का गुबार उड़ता है। हल्की सी हवा में डैम से राख उड़कर इलाके के लोगों के घर और किचन तक पहुंच जाती है। बलियरी इलाके के स्थानीय रहवासी राजेश शाह ने बताया कि इलाके के लोग राखड़ डैम के चलते नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। इन दिनों आंधी चलने पर 10 फीट की दूरी में देखना मुश्किल हो जाता है। हवा चलने पर लोगों को घरों में कैद होना पड़ता है।

राख से हो रही गंभीर बीमारी

बलियरी इलाके के रहवासी बताते हैं कि राख के कारण शरीर मे बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है। आंख में डस्ट चली जाती है, जब खाना खाते हैं तब उसमें भी राख आ जाती है। बाहर की हवा अब सांस लेने के लायक भी नहीं बची है। घर-परिवार के लोग इसी राख की वजह से दमा, अस्थमा, एलर्जी जैसे गंभीर बीमारियों से ग्रसित है। बांध का राख हवा में उड़कर घर में आ जाती है। खाना, पानी में भी राख चली जाती है। हम लोगों के खाने-पीने में भी राख मिल जाती है।

सुविधाएं देने का था वादा, मिला कुछ नहीं

इलाके के स्थानीय लोग बताते हैं कि जब NTPC का यहां राख बांध स्थापित हो रहा था, तब अफसरों ने इलाके के विकास का सपना दिखाया था। राखड़ बांध बनकर तैयार तो हो गया, लेकिन यहां के लोग राख की वजह से घर में कैद हैं। पलायन करने को मजबूर हैं।

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